" एक दिन अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में "
घूमने फिरने का शौक तो सभी को होता है पर कुछ लोग भ्रमण पर निकलते हैं नए नए अनुभवों को बंटोरने के लिए , किसी को प्राकृतिक स्थलों पर घूमना पसंद आता है तो किसी को धार्मिक स्थलों पर , सभी लोग अपनी अपनी पसंद की जगहों पर भ्रमण पर जाते है ताकि वे अपनी तेज़ी से दौड़ती इस ज़िन्दगी में कुछ पल सुकून के पा सकें । मुझे भी घूमना बहुत पसंद है , मैंने कई पर्यटक स्थल , धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों पर भ्रमण किया है । जिनमें से कुछ जगह मुझे बहुत पसंद आयीं , आज जिस जगह का अनुभव में आपसे सांझा कर रहा हूँ वह भी उन्हीं में से एक है । मैं बात कर रहा हूँ राजस्थान की राजधानी जयपुर की , यह शहर पिंकसिटी नाम से देशभर में प्रसिद्द हैं . जयपुर की स्थापना आमेर के राजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) ने की थी . आज के समय में जयपुर एक बहुत बड़ा पर्यटक स्थल हैं.
जयपुर में भ्रमण के लिए कई जगह है जैसे हवा महल , जंतर मंतर , सिटी पैलेस , जल महल , जवाहर कला केंद्र , नाहरगढ़ दुर्ग , आमेर दुर्ग, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय , चोखी ढाणी व कई अन्य स्थान जयपुर में देखने योग्य हैं ।
यदि आपने जयपुर भ्रमण के दौरान अल्बर्ट हॉल संग्रहालय नहीं देखा तो आप बहुत ही खूबसूरत व ऐतिहासिक चीज़ो को देखने से चूक गए। अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में मेरा जाना लगभग एक वर्ष पूर्व हुआ था तब मैं अपने शहर ग्वालियर से जयपुर भ्रमण पर निकला था इसी दौरान मुझे यह अद्भुत संग्रहालय देखने का मौका मिला। इस संग्रहालय की इमारत का निर्माण 1876 में समारोह के आयोजनों के लिए किया गया था और 1887 में इसे आम जनता के लिए संग्रहालय के तौर पर खोल दिया गया।
भारतीय नागरिकों के लिए इस संग्रहालय के टिकट की राशि 40 ₹ है , जबकि विद्यार्थियों के लिए इसका शुल्क 20 ₹ है।
इस संग्रहालय में कई तरह की चित्र , दरियाँ , मूर्तियां , कई शासनकाल की रियासतों के सिक्के , हथियार , कई प्रकार की पगड़ियाँ , भिन्न प्रकार के कीमती पत्थर , वाद्य यंत्र हाथी दाँत व राजस्थान की प्रख्यात "भारत की मोनालीसा" कही जाने वाली तस्वीर "बणी-ठणी "मौजूद हैं। यह संग्रहालय इस तरह से बनाया गया है कि ज्यादा भीड़ होने के बाद भी इसे आसानी से घूमा जा सकता है , इसमें कई बड़े हॉल व कई कमरे है जिनमें सुरक्षा की दृष्टि से गार्ड्स भी रखे गए हैं व सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल भी किया गया है , इसकी दीवारों पर कई तरह की रंग बिरंगी तस्वीरे लगी हुई है व इसकी छतों पर लटकती बड़ी बड़ी झूमरें इसकी सुंदरता और बढ़ा देती हैं।
यह संग्रहालय राजस्थान का सबसे पुराना संग्रहालय है यहाँ देश विदेश से आये पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है और यह जयपुर शहर में आकर्षण का बड़ा केंद्र है।
- उस समय ली गयी कुछ तस्वीरें भी मैं आपसे सांझा कर रहा हूँ ।
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| गरुणासीन लक्ष्मीनारायण |
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| कुरान शरीफ |
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| मुग़लकालीन सिक्का |
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| वाद्य यंत्र |
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| प्राचीन शस्त्र |
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| प्राचीन संगीत के उपकरण |
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| प्राचीन हथियार |
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| अलाउदीन खिलजी शाशनकाल के सिक्के |

आप इस संग्रहालय व इस लेख पर अपने विचार भी ब्लॉग के कॉमेंट सेक्शन में दे सकते है।
- विनय शर्मा









Good work
ReplyDeleteThank you..
Deleteभाई में भी यहां गया था, बहुत सुन्दर ऐतिहासिक वस्तुओ बहुलता है, जो हमे हमारे अतीत से परिचित कराती है।
ReplyDeleteजी भाई बिल्कुल सही
Deleteअदभुत! आपसे एक अनुरोध है कि अगर आप भारत की मोनालिसा पर एक ब्लॉग जरूर लिखें ताकि हमारे ज्ञान मै और वृद्धि हो सके
ReplyDeleteबिल्कुल भाई ज़रूर बनाऊंगा , धन्यवाद ।
Deleteबहुत सुंदर लिखा है विनय भाई
ReplyDeleteधन्यवाद भाई
DeleteKeep it up Vinay !!
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