स्मार्ट सिटी की स्मार्ट सड़कें

ग्वालियर शहर कहने को तो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है लेकिन क्या यह शहर पूरी तरह से स्मार्ट बनने योग्य हो चुका है ? या किस चीज़ के पूर्ति होने पर यह शहर स्मार्ट सिटी कहलाने लगेगा ?
शहर की सड़कें चीख़ चीख़ कर अपना दर्द बयां कर रहीं हैं , इतनी टूटी फूटी सड़कों पर किसी का ध्यान क्यों नहीं जाता ? यदि सड़कों में जान होती तो वह चुनावों (elections) को अपना त्योहार ज़रूर मानती क्योंकि उनका रँग-रोगन तो सिर्फ चुनाव के समय ही होता है.
राजमार्गों के भी यही हाल है , नजाने कितनी दुर्घटनाओं का कारण ये सड़कें रहीं हैं. जब यह सड़कें बनती है तो इसे बनाने वाले इसे सही से न बनाकर , भ्र्ष्टाचारी कर के अपनी जेबें भरने में लग जाते है जिसका परिणाम यह होता है की एक मौसम की बारिश ही इन सड़कों को उधेड़ कर रख देती है.
शासन-प्रशासन के कड़े सड़क नियमों ने तो आम इंसान की कमर ही तोड़ दी है , किसी इंसान की इतनी आमदनी ही न हो उतना तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ सकता है. यदि नियमो का उल्लंघन करने पर इतना अधिक जुर्माना देना पड़ सकता है तो आम आदमी को अच्छी सड़कों पर चलने का भी पूरा हक़ है , उन्हें भी अच्छी , साफ़ सुथरी सड़के मिलनी चाहिए .
यह एकतरफा निर्णय क्यों ?
सिर्फ कागज़ी व लिखित दस्तावेजों में नहीं बल्कि शहर को सही मायने में स्मार्ट बनायें जिसके लिए शहर की सड़कें बहुत महत्वपूर्ण है.



- विनय शर्मा 

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